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69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने नहीं की पैरवी, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी नाराज

69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने नहीं की पैरवी

69000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई मंगलवार को नहीं हो सकी। बताया गया है कि अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी। इसके लिए एक स्पेशल बेंच बनाई जायेगी। सुनवाई न होने से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों में काफी निराशा है। उन्हें उम्मीद थी कि आज यह मामला फाइनल हो जायेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इसके लिए तारीख और समय निर्धारित किया गया था। पिछली सुनवाई 18 नवंबर को लगभग एक घंटे तक हुई थी और शेष सुनवाई 16 दिसम्बर के लिए तारीख तय की गयी थी। माना जा रहा था इस प्रकरण का समाधान हो जायेगा।

सरकार कोर्ट में जवाब देने से भाग रही है

इस मामले में आरक्षित वर्ग की ओर से नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में जवाब देने से भाग रही है और इस मुद्दे पर कोई सक्रियता नहीं दिखा रही है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी पिछले लगभग पांच वर्षों से इस मामले में संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार सरकार को इस प्रकरण का निपटारा तीन महीने के अंदर करना था, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ रहा है।

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वर्ष 2018 में शिक्षक भर्ती का मामला

आपको बता दें कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। आरोप है कि जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट के डबल बेंच ने एक फैसला सुनाया और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गये तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

अधिकारियों ने खिलवाड़ किया, अब कोर्ट कर रहा

पीड़ित शिक्षक अभ्यर्थी देव गुप्ता, इरशाद अहमद ने कहा कि इस भर्ती में अधिकारियों ने धांधली करके हमारे हक अधिकारों को छीन लिया। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और हाईकोर्ट डबल बेंच का आदेश हमारे पक्ष में है लेकिन तारीख पर तारीख देकर सुप्रीम कोर्ट हमारी भावनाओं से खेल रहा है। सुप्रीम कोर्ट अपने ही द्वारा तय की गई तिथि पर सुनवाई करने को तैयार नहीं है तो हम लोग कहां जाएं और किससे निवेदन करें।

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