Site icon Talk2India News

किन्नर समुदाय पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नेग मांगना अधिकार नहीं

किन्नर समुदाय पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने किन्नर समुदाय द्वारा ‘नेग’ या ‘बधाई’ मांगने को लेकर 28 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि किन्नर समुदाय को नेग मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अगर नेग के नाम पर जबरन पैसे लिए जाते हैं, तो इसे अपराध माना जाएगा। कोर्ट के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति से बिना उसकी इच्छा के पैसे लेना या दबाव बनाना कानूनन गलत है और इसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से जुड़ा है, जहां एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ने कोर्ट में याचिका दायर कर कुछ इलाकों में ‘नेग’ लेने का अधिकार मांगा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्षों से एक तय क्षेत्र में नेग लेती रही हैं और वहां दूसरे समूहों के आने से विवाद होता है।

Also Read – अनिल अंबानी पर ED का बड़ा एक्शन, संपत्तियों पर लगा ताला? 

कोर्ट ने खारिज की याचिका

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की “लेवी” या पैसे की वसूली केवल कानून के तहत ही हो सकती है। परंपरा के नाम पर वसूली को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। ऐसी अनुमति देने से अवैध वसूली को बढ़ावा मिलेगा।

Also Read – भारत को ‘नर्क’ बताने पर घिरे ट्रंप, Iran ने कसा तंज-अमेरिका में भी सियासी भूचाल

कानून क्या कहता है?

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जबरन नेग मांगना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। धमकी, दबाव या मजबूरी में पैसे लेना जबरन वसूली (Extortion) माना जाएगा।

परंपरा या कानून

अदालत ने यह माना कि ‘बधाई’ देने की परंपरा समाज में पुरानी और सांस्कृतिक है लेकिन इसे मजबूरी या दबाव में नहीं बदला जा सकता। यानी अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से पैसे देता है तो वह ठीक है, लेकिन जबरदस्ती करना गैरकानूनी होगा।

समाज पर क्या असर?

इस फैसले के बाद समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि इससे किन्नर समुदाय की पारंपरिक आय प्रभावित हो सकती है।

Exit mobile version