UP Bridge Collapse : हमीरपुर में हुए इस दर्दनाक हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर विपक्ष और आम जनता की ओर से तीखे सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश में हमीरपुर में करोड़ों के विकास दावों और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की हवा उस वक्त पूरी तरह निकल गई, जब हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहा 90 करोड़ का एक भारी-भरकम पुल (UP Bridge Collapse) पहली ही तेज आंधी में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ छह बेकसूर मजदूरों की जान ले ली, बल्कि योगी सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्य सेतु निगम के भ्रष्टाचार की पोल भी खोलकर रख दी है। आधी रात को आए इस तूफान ने यह साबित कर दिया कि यूपी में पुल कंक्रीट से नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से बन रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, 28 मई गुरुवार देर रात जब यह भयानक तूफान आया, तब पुल के ऊपर करीब 20 से 25 मजदूर काम में जुटे थे। वहीं, कुछ मजदूर पुल के ठीक नीचे सो रहे थे। आंधी के कारण पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे सो रहे मजदूरों पर गिर गया, जिससे वे मलबे में जिंदा दफन हो गए।
90 करोड़ के बजट में कैसा ‘मटेरियल’ इस्तेमाल हो रहा था?
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन ललपुरा थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर मोरा कांडर और कुरारा को जोड़ने वाले इस निर्माणाधीन पुल का ढहना यह साबित करता है कि करोड़ों के प्रोजेक्ट्स में धांधली बेलगाम है। जनता पूछ रही है कि क्या आंधी आने से पहले पुल के डिजाइन और कंक्रीट की क्वालिटी की जांच नहीं की गई थी?
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राज्य सेतु निगम के अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
हादसे का जिम्मेदार सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम है, जो इस 700 मीटर लंबे पुल का निर्माण करवा रहा था। जब मौसम विभाग ने पहले से ही आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया था, तो निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे? क्या सरकार केवल छोटे ठेकेदारों पर कार्रवाई करके बड़े भ्रष्ट अधिकारियों को बचाएगी?
लेबर लॉ और सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन
हादसे के वक्त मजदूर नीचे सो रहे थे। निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए ‘सेफ्टी शेल्टर’ (सुरक्षित आवास) क्यों नहीं बनाए गए थे? बिना सेफ्टी के मजदूरों से काम कराना और उनकी सुरक्षा की अनदेखी करना सीधे तौर पर प्रशासनिक क्रूरता है।
अपनों को खो चुके परिवारों में कोहराम
हादसे के बाद से ललपुरा थाना क्षेत्र में चीख-पुकार मची है। SDRF और स्थानीय प्रशासन जेसीबी से मलबा हटा रहा है, लेकिन अपनों को खो चुके परिवारों का गुस्सा सरकार और प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है। मरने वाले युवाओं में 19 साल का कुलदीप और 22 साल का लोकेंद्र शामिल हैं, जो अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे।
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हादसे में शिकार हुए मजदूर
- लोकेंद्र निषाद (22 वर्ष) – बांदा
- कुलदीप निषाद (19 वर्ष) – बांदा
- सावंत यादव (28 वर्ष) – बांदा
- सभाजीत (30 वर्ष) – बांदा
- पुष्पेंद्र सिंह चौहान (34 वर्ष) – हमीरपुर
- राजेश पाल (42 वर्ष) – हमीरपुर
विपक्ष का हमला और जनता का आक्रोश
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यूपी की कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खुल रही है। विपक्ष का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में ‘कमीशन खोरी’ और ‘भ्रष्टाचार’ के कारण पुल बनने से पहले ही ढह रहे हैं। जनता अब मुख्यमंत्री से जवाब मांग रही है कि क्या इन 6 मौतों के गुनहगारों पर सरकार का बुलडोजर चलेगा या मामले को हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

