कानपुर का टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला एक आईटीबीपी (ITBP) जवान की मां के इलाज से जुड़ा है, जिसमें परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर इलाज में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है। आरोप है कि उपचार के दौरान महिला के हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया, जो बाद में गैंग्रीन में बदल गया और अंततः महिला का हाथ काटना पड़ा। घटना के बाद से परिजनों में भारी आक्रोश है और पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, आईटीबीपी जवान अपनी बीमार मां को इलाज के लिए कृष्णा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में मामूली संक्रमण और दर्द की शिकायत थी, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आरोप है कि डॉक्टरों ने समय रहते सही उपचार नहीं किया और संक्रमण को गंभीर होने दिया।
परिजनों के मुताबिक, हाथ में सूजन और कालेपन की शिकायत लगातार बढ़ती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। स्थिति तब भयावह हो गई जब महिला के हाथ में गैंग्रीन फैल गया और डॉक्टरों ने हाथ काटने की सलाह दे दी। बाद में महिला का हाथ काटना पड़ा, जिससे पूरा परिवार सदमे में है।
Also Read – गर्मी का महासंकट: 150 साल पुराना वो खौफनाक ‘सुपर अल नीनो’, जिसने निगली थीं करोड़ों जिंदगियां
जवान का दर्द छलका, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
घटना के बाद आईटीबीपी जवान और उनके परिवार का दर्द सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के माध्यम से सामने आया। जवान ने भावुक अपील करते हुए आरोप लगाया कि उनकी मां की जिंदगी अस्पताल की लापरवाही ने बर्बाद कर दी। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में भी नाराजगी फैल गई।
लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में मनमानी और लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने दी क्लीन चिट
मामला बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए एक टीम गठित की। टीम ने अस्पताल के दस्तावेज, इलाज की प्रक्रिया और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की। हालांकि जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी। यहीं से विवाद और ज्यादा गहरा गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई और अस्पताल प्रशासन को बचाने का प्रयास किया गया। परिजनों का कहना है कि यदि कोई लापरवाही नहीं हुई थी तो महिला का हाथ आखिर क्यों काटना पड़ा।
जांच पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
- क्या जांच टीम ने स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय ली?
- क्या महिला की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री को आधार बनाया गया?
- क्या संक्रमण पहले से गंभीर था या इलाज के दौरान बढ़ा?
- अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष होती तो रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय होती। कई सामाजिक संगठनों ने भी स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने की मांग उठाई है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है। अस्पताल का कहना है कि महिला पहले से गंभीर संक्रमण से पीड़ित थीं और मेडिकल स्थिति अत्यंत जटिल थी। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय निर्णय लिए। हालांकि पीड़ित परिवार अस्पताल के इस पक्ष से संतुष्ट नहीं है।
Also Read – Palak Death Case : दहेज की भेंट चढ़ी इंस्टाग्राम क्वीन, शादी के एक साल बाद संदिग्ध मौत
पीड़ित परिवार की अगली तैयारी
आईटीबीपी जवान और उनके परिवार ने अब उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि परिवार पुलिस कमिश्नर, शासन स्तर और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। परिवार उपभोक्ता फोरम या हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर भी विचार कर रहा है।
परिजनों की मांग है कि—
- स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराई जाए,
- दोषी डॉक्टरों और स्टाफ पर कार्रवाई हो,
- पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
टाटमिल और आसपास के इलाकों में इस घटना को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही का है। निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
फिलहाल यह मामला कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर स्वास्थ्य विभाग अस्पताल को क्लीन चिट दे चुका है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

