Kanpur Shuklaganj Bridge : डीएम ने लिया बड़ा फैसला, अचानक खाली होने लगा शुक्लागंज का यह इलाका

Kanpur Shuklaganj Bridge : गंगा किनारे शुक्लागंज में लंबे समय से रह रहे लोगों के लिए नई समस्या खड़ी हो गई है। उन्नाव एसडीएम ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिससे वहां रह रहे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। कानपुर और शुक्लागंज को जोड़ने वाले निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी नवीन गंगा पुल परियोजना को रफ्तार देने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है।

पुल (Kanpur Shuklaganj Bridge) के पहुंच मार्ग के निर्माण की जद में आ रहे मकानों के विस्थापन और मुआवजे की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। लंबे समय से चल रहे भूमि और भवन अधिग्रहण के गतिरोध को दूर करते हुए 5 जून को कुल 39 चिन्हित मकानों में से 9 गृहस्वामियों को मुआवजे के चेक वितरित कर दिए गए।

एसडीएम की मौजूदगी में आपसी सहमति से हुआ भुगतान

इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुआवजा वितरण प्रक्रिया की कमान खुद सदर एसडीएम क्षितिज द्विवेदी ने संभाली। परियोजना को समय पर पूरा करने और स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एसडीएम ने प्रभावित गृहस्वामियों के साथ खुद बैठक की और लंबी सकारात्मक वार्ता की। प्रशासन और जनता के बीच आपसी सहमति बनने के बाद पूरी पारदर्शिता के साथ इन 9 गृहस्वामियों को उनकी निर्धारित मुआवजा राशि के चेक सौंप दिए गए।

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एक हफ्ते के भीतर खाली करने होंगे मकान

चेक प्राप्त करने वाले सभी 9 गृहस्वामियों को प्रशासन की ओर से एक सप्ताह का कड़ा समय दिया गया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे तय समय सीमा के भीतर अपने भवनों को पूरी तरह से खाली कर दें। मकान खाली होने के तुरंत बाद लोक निर्माण विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की टीमें इन भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करेंगी, ताकि एप्रोच रोड के निर्माण में कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए।

Kanpur Shuklaganj Bridge

शेष भवन स्वामियों को जल्द मिलेगा मुआवजा

इस फोरलेन पुल परियोजना के सुचारू निर्माण के लिए कुल 39 मकान एप्रोच मार्ग की जद में आ रहे हैं, जिन्हें हटाया जाना बेहद जरूरी है। सफल वार्ता के बाद पहले चरण में 9 लोगों को भुगतान कर दिया गया है। सदर एसडीएम क्षितिज द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि शेष बचे 30 भवन स्वामियों के कागजी दस्तावेजों का सत्यापन और उनके साथ मुआवजे की दर को लेकर वार्ता की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। उन्हें भी बहुत जल्द मुआवजे की राशि का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि विस्थापन की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।

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क्यों उठाया गया यह कदम?

कानपुर और शुक्लागंज के बीच बन रहे इस ₹235 करोड़ के हाई-टेक फोरलेन पुल का काम काफी समय से चल रहा है। नदी के भीतर पिलर खड़े होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती दोनों छोरों (विशेषकर शुक्लागंज की तरफ ‘तिवारी का बगीचा मोड़’ और मिश्रा कॉलोनी) पर एप्रोच रोड और रेलवे ओवरब्रिज बनाने की थी। चूंकि यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है, इसलिए मकानों के विस्थापन को लेकर काम की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका थी। लेकिन आज प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस मुआवजा वितरण के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आएगी।

11 महीने की डेडलाइन पर काम जारी

लोक निर्माण विभाग मुख्यालय ने इस पुल को चालू करने के लिए 11 महीनों की सख्त समय सीमा तय की है। आज की इस प्रशासनिक कार्रवाई से स्पष्ट है कि विभाग और जिला प्रशासन हर हाल में तय समय के भीतर कानपुर-शुक्लागंज के करीब 4 लाख लोगों को जाम के इस पुराने दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। विस्थापन की प्रक्रिया पूरी होते ही यहां मिट्टी भराई और एप्रोच रोड की कंक्रीट वॉलिंग का काम शुरू हो जाएगा।

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