Lucknow Sewer Accident : आखिर किसके इशारे पर 20 फीट गहरे ‘डेथ ट्रैप’ में उतरे थे पिता-पुत्र?

आखिर 20 फीट गहरे सीवर (Lucknow Sewer Accident) में ऐसा क्या हुआ कि 2 घंटे तक फंसे रहे पिता-पुत्र की तड़पकर मौत हो गई? सीवर सफाई के दौरान हुए इस दिल दहला देने वाले हादसे ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। जानिए इस दर्दनाक घटना की पूरी खबर और किसकी लापरवाही ने ली दो मासूम जानें।

लखनऊ के रेजिडेंसी क्षेत्र में सीवर लाइन (Lucknow Sewer Accident) की सफाई के दौरान जहरीली गैस के चपेट में आने से पिता और बेटे की मौत हो गई। दोनों करीब दो घंटे तक लगभग 20 फीट गहरे सीवर में फंसे रहे। बाहर निकालकर दोनों को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दोनों एक ठेकेदार के अधीन कार्य कर रहे थे। आरोप है कि उन्हें बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतारा गया था। न तो उनके पास ऑक्सीजन सिलेंडर था, न गैस डिटेक्टर, न ही सेफ्टी बेल्ट।

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही मृतकों के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा भी दिया जाएगा। लखनऊ में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 8 मई 2026 को माल क्षेत्र में एक सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों, रिंकू और राजेश की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई थी।

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हादसों में दिख रहा एक जैसा पैटर्न

हाल के सभी मामलों में कुछ एक जैसे तथ्य सामने आए हैं। मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के बंद सीवर और सेप्टिक टैंकों में उतार दिया जाता है। मीथेन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैस जमा हो जाती है, जिनकी वजह से अंदर जाते ही दम घुटने लगता है। अक्सर एक व्यक्ति के बेहोश होने पर उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति नीचे उतरता है और वह भी हादसे का शिकार हो जाता है।

कानून क्या कहता है?

‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013’ के तहत बिना सुरक्षा उपकरणों के किसी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक में उतारना अपराध की श्रेणी में आता है। कानून के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है तथा उन्हें जेल की सजा भी हो सकती है।

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नगर निगम पर उठ रहे सवाल

हर हादसे के बाद जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े होते हैं। अक्सर नगर निगम और संबंधित एजेंसियां ठेकेदारों पर जिम्मेदारी डाल देती हैं, जबकि श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और मानकों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी होती है।

नगर निगम ने हाल के हादसों को देखते हुए खुले नालों और मैनहोल को तत्काल ढकने तथा 24 घंटे कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी के निर्देश जारी किए हैं। नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं खुला मैनहोल दिखाई दे तो इसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1533 पर दें।

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