किस्सा कागजी नोटों का खत्म! RBI लाने जा रहा है पॉलिमर नोट

क्या आने वाले समय में हमारी जेब में रहने वाले करेंसी नोट पूरी तरह बदल जाएंगे? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गलियारों से आ रही खबरें तो इसी ओर इशारा कर रही हैं। देश में बढ़ती नकद की मांग, नोट छपाई के भारी-भरकम खर्च और गंदे होकर फटने वाले नोटों की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई अब देश में ‘पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट’ लाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर यह कामयाब रहा, तो भारतीय मुद्रा इतिहास में यह एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा।

पॉलिमर नोट क्यों हैं आज की जरूरत?

पॉलिमर करेंसी नोट एक विशेष प्रकार के सिंथेटिक मटेरियल पॉलीप्रोपाइलीन से तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक सूती-कागज के नोटों की तुलना में इनके कई बड़े फायदे हैं –

  • मजबूत और टिकाऊ: ये नोट पानी और नमी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं।
  • लंबी उम्र: कागजी नोटों के मुकाबले इनकी उपयोग अवधि बहुत अधिक होती है।
  • किफायती और इको-फ्रेंडली: लंबी अवधि में इन्हें कम खर्च वाला और पर्यावरण के लिहाज से काफी बेहतर विकल्प माना जाता है

Also Read – क्या होता है जब आप AC वाले कमरे में रखते हैं बाल्टी?

क्यों फेल हुआ था 2012 का पहला ट्रायल?

यह पहली बार नहीं है जब भारत में प्लास्टिक नोट लाने की बात हो रही है। पहला प्रयास साल 2012 में देश के पांच चुनिंदा शहरों में ₹10 के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल प्रस्तावित किया गया था।

क्यों फेल हुई थी योजना: उस समय तकनीकी चुनौतियों और एटीएम मशीनों की सेटिंग से जुड़ी समस्याओं के कारण इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

अब क्या बदला: आरबीआई का मानना है कि पिछले एक दशक में तकनीक काफी उन्नत हो चुकी है और अब देश के एटीएम नेटवर्क को इन आधुनिक नोटों के अनुरूप आसानी से ढाला जा सकता है।

जल्द शुरू हो सकता है पायलट प्रोजेक्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआई जल्द ही प्लास्टिक के नोटों के सार्वजनिक इस्तेमाल को परखने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि हालांकि इनकी शुरुआत की उत्पादन लागत थोड़ी भिन्न हो सकती है, लेकिन इनकी लंबी उम्र के कारण यह सामान्य नोटों से कहीं अधिक किफायती साबित होंगे।

Also Read – Sahara Desert Tragedy : बॉर्डर पर प्यास से तड़प कर 49 यात्रियों की मौत, ज़िंदा बचे 2 लोग

FY25 की एनुअल रिपोर्ट: नोट छापने की लागत और खराब नोटों के चौंकाने वाले आंकड़े

RBI की वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट देश में नकदी (Cash) की मजबूत स्थिति और बढ़ते खर्चों को बयां करती है:

विवरण                                                                     आंकड़े
FY25 में नोट छपाई का कुल खर्च                              ₹6,372.8 करोड़ (पिछले वर्ष ₹5,101.4 करोड़ था)
FY25 में नष्ट किए गए खराब/गंदे नोट                        23.8 अरब नोट (पिछले वर्ष के मुकाबले 12.3% अधिक)
सबसे ज्यादा नष्ट होने वाले नोट                                   ₹500 के नोट (पहले स्थान पर) और ₹100 के नोट (दूसरे स्थान पर)
15 मई तक करेंसी इन सर्कुलेशन                   11.5% की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़
FY27 के शुरुआती डेढ़ महीने में इजाफा                   ₹1.15 लाख करोड़ रुपये की भारी वृद्धि

दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से है सिक्का

  • यदि आरबीआई इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे देता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां उन्नत मुद्रा प्रणाली है।
  • ऑस्ट्रेलिया साल 1988 में पॉलिमर नोट अपनाने वाला दुनिया का सबसे पहला देश था।
  • इसके बाद कनाडा, सिंगापुर और कई अन्य विकसित देशों ने भी प्लास्टिक नोटों को अपनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *