Bihar : पटना (बाढ़) से सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल की एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल परिसर में चार एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर हालत में रेफर की गई 15 वर्षीय बच्ची को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। नतीजा यह हुआ कि मासूम मरीज करीब चार घंटे तक अस्पताल में ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही। बाद में सिविल सर्जन के हस्तक्षेप के बाद मोकामा से एंबुलेंस मंगाकर उसे पटना भेजा गया।
जानकारी के अनुसार, शिव शंकर प्रसाद की पुत्री रिया कुमारी की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे तत्काल पटना रेफर कर दिया। लेकिन रेफरल के बाद भी अस्पताल प्रशासन समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा सका। परिजन लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
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चार एंबुलेंस थी मौजूद, फिर भी नहीं मिली सुविधा
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में चार एंबुलेंस मौजूद थीं, जिनमें से तीन पुराने भवन के पीछे खड़ी कर दी गई थीं। आरोप है कि ड्यूटी से बचने के लिए एंबुलेंस चालकों ने वाहन बाहर नहीं निकाले। इस वजह से गंभीर मरीज को समय पर इलाज के लिए नहीं भेजा जा सका।
सिविल सर्जन के हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
जब मामले की जानकारी पटना के सिविल सर्जन तक पहुंची तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मोकामा से एंबुलेंस बाढ़ भेजी गई, जिसके जरिए करीब चार घंटे बाद बच्ची को बेहतर इलाज के लिए पटना रवाना किया गया।
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना ने बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल की कार्यप्रणाली और एंबुलेंस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल में यदि गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस तक नहीं मिल पा रही है, तो स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों और एंबुलेंस चालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।