लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी के राजनीतिक उत्तराधिकारी सुफ़ियान अली क़ुरैशी ने गोरखनाथ मठ और अवध के नवाब आसिफ-उद-दौला से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा का हवाला देते हुए पुराने दस्तावेजों और ऐतिहासिक स्रोतों की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उपलब्ध अभिलेख सामने आने चाहिए, ताकि ऐतिहासिक तथ्य स्पष्ट हो सकें।
क़ुरैशी ने कहा कि क्रिस्टीन होप मरेवा कारवोस्की ने कोलंबिया विश्वविद्यालय में नाथ संप्रदाय के इतिहास पर किए अपने शोध ‘इम्प्रिंटेड आइडेंटिटी: ए हिस्ट्री ऑफ लिटरेचर एंड कम्यूनल सेल्फहुड इन द नाथ संप्रदाय’ में गोरखपुर में प्रचलित एक कथा का उल्लेख किया है। इसके मुताबिक, अवध के नवाब आसिफ-उद-दौला के गोरखपुर आने पर उनकी मुलाकात सूफी बुजुर्ग बाबा रोशन अली शाह से हुई थी। बाबा रोशन अली शाह ने नवाब को अपने मित्र और नाथ संप्रदाय के संत गोरक्षनाथ से मिलने की सलाह दी। शोध में उद्धृत इस प्रचलित कथा के अनुसार, नवाब दोनों संतों से प्रभावित हुए और उन्हें जमीन प्रदान की।
क़ुरैशी ने कहा, “इसकी पूरी तफ्तीश होनी चाहिए। संभव है कि पुराने दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच से यह सामने आए कि आज के गोरखनाथ मठ का विस्तार भी नवाब आसिफ-उद-दौला द्वारा दी गई जमीन पर हुआ हो।”
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत मिसाल है। एक मुस्लिम सूफी बुजुर्ग का मुस्लिम नवाब को अपने हिंदू संत मित्र से मिलने और आशीर्वाद लेने के लिए भेजना बताता है कि हिंदुस्तान की असली पहचान आपसी मोहब्बत, सम्मान और भाईचारा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए क़ुरैशी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ स्वयं उसी नाथ परंपरा और गोरखनाथ मठ का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए उन्हें अपने मठ से जुड़ी इस साझा विरासत और इतिहास से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमानों की मस्जिदों और दूसरी इबादतगाहों को निशाना बनाकर प्रदेश के माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के पास विकास और जनहित के मुद्दों पर जनता को बताने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है। इसलिए धार्मिक मामलों को उछालकर समाज को बांटने और चुनावी फायदा लेने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश की जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है और इसके जाल में नहीं आएगी।
क़ुरैशी ने कहा, “यह हकीकत है कि मुसलमानों के साथ नाइंसाफी की जाती है, उनकी इबादतगाहों को जमींदोज किया जाता है और उन्हें सियासी, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से पीछे करने की कोशिश की जाती है। इसके बावजूद मुसलमानों ने सब्र का दामन थामा हुआ है। हमें इस मुल्क की अदालतों और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान पर पूरा भरोसा है। हमें यकीन है कि हमें इंसाफ मिलेगा।”
उन्होंने आगे कहा, “जिस दिन इंसाफ मिलेगा, जहां-जहां हमारी मस्जिदों और इबादतगाहों को गैरकानूनी तरीके से जमींदोज किया गया है, उन्हें कानून और अदालत के फैसले के मुताबिक दोबारा तामीर कराया जाएगा। मुझे पूरा यकीन है कि उस दिन हमारे हिंदू भाई भी हमारे साथ खड़े होंगे, क्योंकि यह लड़ाई हिंदू-मुसलमान की नहीं, बल्कि इंसाफ, संविधान और कानून की लड़ाई है।”
क़ुरैशी ने कहा कि मुसलमानों का सब्र उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि इस देश के संविधान और न्याय व्यवस्था में उनके विश्वास का सबूत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी तहज़ीब को नफरत और सांप्रदायिक राजनीति से खत्म नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि 2027 में प्रदेश की जनता नफरत और बंटवारे की राजनीति को नकारकर विकास, इंसाफ और भाईचारे को चुनेगी तथा अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी को मजबूत करेगी।