vaccine Covishield: कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मुआवजे की भी उठी मांग

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स की ओर से बनाई गई कोविड-19 वैक्सीन

May 2, 2024 - 10:20
May 3, 2024 - 15:15
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vaccine Covishield: कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मुआवजे की भी उठी मांग

वैश्विक फार्मास्युटिकल एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया है कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इससे रक्त के थक्के बन सकते हैं। एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाई कोर्ट में वैक्सीन के नुकसान की बात स्वीकारी है. इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया है. भारत में भी यही वैक्सीन कोविशील्ड नाम से लगाई गई है। अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के हित में निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

आवेदन में मेडिकल एक्सपर्ट पैनल में अखिल भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग उठाई गई है. वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से 2021 से लंबित याचिका में एस्ट्राजेनेका के कबूलनामे के आधार पर आगे कदम उठाने की मांग की है. अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई जाए. कोविशील्ड के साइड इफेक्ट की जांच करें.

पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की मांग
अर्जी में कहा गया था कि कमेटी में एम्स, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली के निदेशक और विशेषज्ञों को सदस्य के तौर पर शामिल किया जाए. वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स और जोखिमों की जांच करने और नुकसान का निर्धारण करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने की मांग की गई है. इसके अलावा प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देने की व्यवस्था की जानी चाहिए. कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव से जो लोग गंभीर रूप से विकलांग हो गए हैं या जिनकी मौत हो गई है, उनके आश्रितों को मुआवजा देने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई
भारत में कोविशील्ड का निर्माण पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया है। इसकी 175 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं. एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश अदालत में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) के साथ-साथ थ्रोम्बोसिस के दुष्प्रभाव को भी स्वीकार किया है। इस वैक्सीन पर गंभीर नुकसान और मौत का आरोप लगा है, जिसका मामला ब्रिटेन के हाई कोर्ट में चल रहा है. यूरोप में टीकाकरण अभियान शुरू होने के कुछ महीनों के भीतर ही मामले सामने आए, जिसके बाद कुछ देशों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी.

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